
नई दिल्ली (28 नवंबर) : जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक़ अब्दुल्ला ने कहा है कि अगर भारत की सारी सेना भी आ जाए तो आतंकवादियों के ख़िलाफ डिफेंड नहीं कर सकती। फारुक़ अब्दुल्ला के मुताबिक बातचीत ही जम्मू-कश्मीर की समस्या को सुलझाने का इकलौता तरीका है।
फारुख़ अब्दुल्ला ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा, “हिंदुस्तान की सारी फौज भी आ जाए तो टेरेरिस्ट या मिलिटेंट्स के खिलाफ डिफेंड नहीं कर सकती। आतंकवादियों से बातचीत करके मामला हल करना चाहिए। यही एक रास्ता है। लेकिन ये होगा कभी नहीं। पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट होना चाहिए। सुचेतगढ़ का (भारत-पाक को जोड़ता) रास्ता खोला जाना चाहिए।’’
पीओके पर फारुक़ अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘पीओके को पाकिस्तान का हिस्सा रहना चाहिए और जम्मू-कश्मीर को भारत का। मैं ये पहली बार नहीं कहा रहा हूं। आज मीडिया बहुत मजबूत है। जब किसी घटना की जानकारी दी जाती है तो यह सोचा जाना चाहिए कि इसका इफेक्ट देश पर क्या होगा? भारत भी न्यूक्लियर पॉवर है और पाकिस्तान भी। दोनों किसी से एक-दूसरे का इलाका नहीं छीन सकते।”
एक दिन पहले फारुक़ ने कहा था, "पीओके अब पाकिस्तान का ही हिस्सा बना रहेगा और जम्मू-कश्मीर भारत का। हमें इस बात को समझने की जरूरत है। जंग किसी भी मुद्दे का हल नहीं है। जंग में हम सिर्फ जिंदगियां खोते हैं। बातचीत ही ऑप्शन है।"
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