जब भी आप यह सुनते हैं कि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आया है। तो आपके दिमाग में एक तस्वीर उभरती होगी जिसमें व्यक्ति हांफता है, अपना सीना पकड़ता है और जमीन पर गिर जाता है। लेकिन, हकीकत में अगर ऐसी घटना किसी महिला के साथ हो तो यह दृश्य थोड़ा अलग होगा। यह बिल्कुल भी इतना नाटकीय नहीं होगा।
हालांकि, महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हार्ट अटैक के कई लक्षण समान होते हैं। लेकिन कई लक्षण दोनों में ही अलग भी हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के डॉक्टर जोसेफ फ्रिट्ज़ ने इन दोनों के लक्षणों में कई बड़े अंतर बताए हैं।
महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हार्ट अटैक आने पर सीने में कठोर तनाव, दर्द, या सीने, गले, जबड़े हाथों और पीठ में दबाव महसूस हो सकता है। अजीब सी थकान, सांस में कमी, खांसी, बीमार महसूस होना या उल्टी होना कुछ लक्षण हैं, जो आम तौर पर दोनों ही लिंग के व्यक्तियों में देखे जाते हैं।
डॉक्टर फ्रिट्ज़ ने लोगों से अपील की है कि हर बार हार्ट अटैक अलग होता है और इसके लक्षण हमेशा समान नहीं होते। लेकिन फिर भी संभावित लक्षण महसूस होने पर इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। साथ ही तुरंत ही मेडिकल उपचार करवाना चाहिए।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, पहले हार्ट अटैक के बाद एक साल के भीतर मौत होने की संभावना पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि, दोनों ही लिंगों में सीने में दर्द एक प्राथमिक लक्षण है। लेकिन महिलाओं में कुछ असामान्य और अजीब लक्षण देखे जाते हैं। जैसे जॉ पेन (जबड़ों में दर्द)। नॉसा या कमजोरी का एहसास होना। इस साल की शुरुआत में ओहिओ स्टेट यूनिवर्सिटी की डॉक्टर लक्ष्मी मेहता ने कहा, "ये लक्षण मरीज और डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।"
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