आपको पता होगा की किन्नर समुदाय समाज से अलग ही रहता है और इसीलिए आम लोगों में इनके जीवन और रहन-सहन के बारे में जानने की इच्छा काफी रहती है। आप यहां जानिए किन्नर समुदाय से कुछ जुड़ी खास बातें…1. ज्योतिष शास्त्र के मुताबित वीर्य की अधिकता से पुरुष (पुत्र) पैदा होता है एवं रक्त (रज) की अधिकता से स्त्री (कन्या) उत्पन्न होती है परन्तु किन्नर संतान की उत्पत्ति वीर्य और राज़ समान होने पर होती है।
2. किन्नर पुराने समय में राजा-महाराजाओं के यहां नाचना-गाना करके अपनी जीविका चलाते थे।
3. कहा जाता है किन्नर की दुआएं किसी भी व्यक्ति के बुरे वक्त को भी दूर कर सकती हैं और तो और धन का लाभ चाहते है तो किसी किन्नर से एक सिक्का लेकर अपने पर्स में रखे।
5. मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी की छाया से किन्नरों की उत्पत्ति हुई है। दूसरी मान्यता यह है कि अरिष्टा और कश्यप ऋषि से किन्नरों की उतपत्ति हुई है।
6. पुरानी मान्यताओं में कहा गया है कि शिखंडी को किन्नर ही माना गया है। शिखंडी के कारण ही अर्जुन ने भीष्म को युद्ध में हरा दिया था।
7. जब भी आपकी कुंडली में बुध गृह कमजोर हो तो उस समय किसी किन्नर को हरे रंग की चूड़ियां व साडी दान करनी चाहिए। इससे लाभ होता है।
8. यहाँ तक कि किनर समाज में किसी नए वयक्ति को शामिल करने के भी कुछ नियम है। इस समाज में इसके लिए विभिनं रीती-रिवाज़ है, जिनका पालन किया जाता है। नए किन्नर को अपने समाज में शामिल करने से पहले नाच-गाना और सामूहिक भोज भी होता है।
9. अभी तक तो इस देश में किन्नरों की चार देवियां हैं।
10. आपको बता दे यदि कुंडली में बुध, शुक्र, शनि और केतु के अशुभ योगों से भी व्यक्ति किन्नर या नपुंसक हो सकता है।
11. किसी किन्नर की मृत्यु होने पर उसका अंतिम संस्कार काफी गुप्त तरीकों से किया जाता है।
12. यह भी माना जाता है कि किसी किन्नर की जब मौत होती है तो उसे किसी गैर किन्नर को नहीं दिखाया जाता। क्योकि ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से जो मरने वाला व्यक्ति है वो फिर से अगले जन्म में भी किन्नर ही पैदा होगा। किन्नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं.
13. किन्नरों की शव यात्राएं रात्रि में ही निकाली जाती है। कहा जाता है कि किसी किन्नर की शव यात्रा को उठाने से पहले मरे हुए किन्नर को जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है और किन्नर के मरने बाद से पूरा हिंजड़ा समुदाय एक हफ्ते तक भूखा रहता है।
14. गुरू शिष्य जैसे प्राचीन परम्परा किन्नर समुदाय में आज भी पहले जैसी बनी हुई है। किन्नर समुदाय के सदस्य स्वयं को मंगल मुखी कहते है क्योंकि ये केवल मांगलिक कार्यो में ही हिस्सा लेते हैं मातम में नहीं ।
15. किसी किन्नर के मरने के बाद किन्नर समाज कि सबसे बड़ी विशेषता है यह मातम नहीं मनाते हैं। किन्नर समाज में एक मान्यता है कि मरने के बाद इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है। इस कारण मरने के बाद ये लोग खुशी मानते हैं । ये लोग अपने स्वंय के पैसो से काफी दान कार्य भी करवाते रहते है जिससे पुन: उन्हें इस रूप में पैदा ना होना पड़े।
16. बता दे देश में हर वर्ष किन्नरों की संख्या में 40-50 हजार की वृद्धि होती है। पुरे देशभर के तमाम किन्नरों में से 90 फीसद ऐसे होते हैं जिन्हें बनाया जाता है। वक्त के साथ किन्नर बिरादरी में वो लोग भी शामिल होते चले गए जो जनाना भाव रखते हैं।
17. इनकी दुनिया का एक खौफनाक सच यह भी है कि यह समाज कुछ ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो, जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्वाब देखता हो। एवं यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर वक्त आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है। बधिया मतलब की उसके शरीर के हिस्से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता।
18. अब तक देश में मौजूद 50 लाख से भी अधिक किन्नरों को तीसरे दर्जे में शामिल कर लिया गया है। और अपने इस हक के लिए किन्नर बिरादरी सालो से लड़ाई लड़ रही थी। 1871 से पहले तक भारत में किन्नरों को ट्रांसजेंडर का अधिकार मिला हुआ था। लेकिन 1871 में अंग्रेजों ने किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स मतलब जरायमपेशा जनजाति की श्रेणी में डाल दिया था। बाद में आजाद हिंदुस्तान का जब नया संविधान बना तो 1951 में किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स से निकाल दिया गया। मगर उन्हें उनका हक तब भी नहीं मिला था।
19. आपको बता दे सिंहस्थ में 13 अखाड़े शामिल होते हैं, जबकि इस बार एक नया अखाड़ा और बना है। ये अखाड़ा है किन्नर अखाड़ा। किन्नर अखाड़े को लेकर वक्त - वक्त पर कुछ विवाद होते रहे हैं। इस अखाड़े का मुख्य उद्देश्य किन्नरों को भी समाज में समानता का अधिकार दिलवाना है।
20. किन्नर अपने आराध्य देव अरावन से वर्ष में एक बार विवाह करते है। हालांकि यह विवाह केवल एक दिन के लिए होता है। अगले दिन अरावन देवता की मौत के साथ ही उनका वैवाहिक जीवन भी खत्म हो जाता है।
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9. अभी तक तो इस देश में किन्नरों की चार देवियां हैं।
10. आपको बता दे यदि कुंडली में बुध, शुक्र, शनि और केतु के अशुभ योगों से भी व्यक्ति किन्नर या नपुंसक हो सकता है।
11. किसी किन्नर की मृत्यु होने पर उसका अंतिम संस्कार काफी गुप्त तरीकों से किया जाता है।
12. यह भी माना जाता है कि किसी किन्नर की जब मौत होती है तो उसे किसी गैर किन्नर को नहीं दिखाया जाता। क्योकि ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से जो मरने वाला व्यक्ति है वो फिर से अगले जन्म में भी किन्नर ही पैदा होगा। किन्नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं.
13. किन्नरों की शव यात्राएं रात्रि में ही निकाली जाती है। कहा जाता है कि किसी किन्नर की शव यात्रा को उठाने से पहले मरे हुए किन्नर को जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है और किन्नर के मरने बाद से पूरा हिंजड़ा समुदाय एक हफ्ते तक भूखा रहता है।
14. गुरू शिष्य जैसे प्राचीन परम्परा किन्नर समुदाय में आज भी पहले जैसी बनी हुई है। किन्नर समुदाय के सदस्य स्वयं को मंगल मुखी कहते है क्योंकि ये केवल मांगलिक कार्यो में ही हिस्सा लेते हैं मातम में नहीं ।
15. किसी किन्नर के मरने के बाद किन्नर समाज कि सबसे बड़ी विशेषता है यह मातम नहीं मनाते हैं। किन्नर समाज में एक मान्यता है कि मरने के बाद इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है। इस कारण मरने के बाद ये लोग खुशी मानते हैं । ये लोग अपने स्वंय के पैसो से काफी दान कार्य भी करवाते रहते है जिससे पुन: उन्हें इस रूप में पैदा ना होना पड़े।
16. बता दे देश में हर वर्ष किन्नरों की संख्या में 40-50 हजार की वृद्धि होती है। पुरे देशभर के तमाम किन्नरों में से 90 फीसद ऐसे होते हैं जिन्हें बनाया जाता है। वक्त के साथ किन्नर बिरादरी में वो लोग भी शामिल होते चले गए जो जनाना भाव रखते हैं।
17. इनकी दुनिया का एक खौफनाक सच यह भी है कि यह समाज कुछ ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो, जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्वाब देखता हो। एवं यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर वक्त आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है। बधिया मतलब की उसके शरीर के हिस्से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता।
18. अब तक देश में मौजूद 50 लाख से भी अधिक किन्नरों को तीसरे दर्जे में शामिल कर लिया गया है। और अपने इस हक के लिए किन्नर बिरादरी सालो से लड़ाई लड़ रही थी। 1871 से पहले तक भारत में किन्नरों को ट्रांसजेंडर का अधिकार मिला हुआ था। लेकिन 1871 में अंग्रेजों ने किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स मतलब जरायमपेशा जनजाति की श्रेणी में डाल दिया था। बाद में आजाद हिंदुस्तान का जब नया संविधान बना तो 1951 में किन्नरों को क्रिमिनल ट्राइब्स से निकाल दिया गया। मगर उन्हें उनका हक तब भी नहीं मिला था।
19. आपको बता दे सिंहस्थ में 13 अखाड़े शामिल होते हैं, जबकि इस बार एक नया अखाड़ा और बना है। ये अखाड़ा है किन्नर अखाड़ा। किन्नर अखाड़े को लेकर वक्त - वक्त पर कुछ विवाद होते रहे हैं। इस अखाड़े का मुख्य उद्देश्य किन्नरों को भी समाज में समानता का अधिकार दिलवाना है।
20. किन्नर अपने आराध्य देव अरावन से वर्ष में एक बार विवाह करते है। हालांकि यह विवाह केवल एक दिन के लिए होता है। अगले दिन अरावन देवता की मौत के साथ ही उनका वैवाहिक जीवन भी खत्म हो जाता है।
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