आगरा - हर साल बटेश्वर में उत्तर भारत का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। इसमें हजारों जानवर बिकने के लिए आते हैं। सबसे पहले दूध देने वाले पशुओं की नीलामी होती है। इसके बाद घोड़े और ऊंट का मेला लगता है। इस बार हर रोज 30 हजार रुपए कमाने वाले बादशाह घोड़े की काफी डिमांड रही। बादशाह स्पर्म (वीर्य) बेचकर हर साल डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई करता है। बादशाह मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा है। वो रोजाना ड्राई फ्रूट्स, पौष्टिक दालें, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और चने
खाता है, ताकि वो तंदुरुस्त बना रहे। हरियाणा के टीटू हरियाणवी के स्टॉल पर बादशाह, भूतनाथ और तूफान नाम के घोड़ों की जबरदस्त मांग रही। टीटू हरियाणी के मुताबिक, बादशाह की कीमत 11 लाख रुपए है। दिन में वो आठ से दस बार स्पर्म (वीर्य) देता है। खाने में रोज खर्च होते हैं तीन हजार रुपए बादशाह के बारे में रखवाली करने वाले राजाराम जाट ने बताया कि घोड़ों का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। रोज सुबह उसे आधा किलो देशी घी, पौष्टिक भीगी हुईं दालें, पिस्ता, बादाम के साथ-साथ अश्वगंधा, शिलाजीत जैसी कई यौनवर्धक जड़ी-बूटियों के साथ बढ़िया चने की दाल खिलाई जाती है। मेले के अलावा फार्म हाउस पर बादशाह का विशेष ख्याल रखा जाता है। साफ-सफाई का रखा जाता है। साथ ही साथ रोजाना वर्जिश भी कराई जाती है, क्योंकि खुराक के बाद अगर इन्हें दौडाया नहीं गया तो ये सुस्त होकर बीमार हो जाएंगे। मेले में आए मथुरा के धीनू पासी ने बताया कि आमतौर पर घोड़ी को लेकर फार्म हाउस जाना पड़ता है और वहां पैसे देने के बाद भी सही काम की गारंटी नहीं है, लेकिन यहां बादशाह के द्वारा दो बार में उनकी घोड़ी मीना गर्भ से है।
खाता है, ताकि वो तंदुरुस्त बना रहे। हरियाणा के टीटू हरियाणवी के स्टॉल पर बादशाह, भूतनाथ और तूफान नाम के घोड़ों की जबरदस्त मांग रही। टीटू हरियाणी के मुताबिक, बादशाह की कीमत 11 लाख रुपए है। दिन में वो आठ से दस बार स्पर्म (वीर्य) देता है। खाने में रोज खर्च होते हैं तीन हजार रुपए बादशाह के बारे में रखवाली करने वाले राजाराम जाट ने बताया कि घोड़ों का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। रोज सुबह उसे आधा किलो देशी घी, पौष्टिक भीगी हुईं दालें, पिस्ता, बादाम के साथ-साथ अश्वगंधा, शिलाजीत जैसी कई यौनवर्धक जड़ी-बूटियों के साथ बढ़िया चने की दाल खिलाई जाती है। मेले के अलावा फार्म हाउस पर बादशाह का विशेष ख्याल रखा जाता है। साफ-सफाई का रखा जाता है। साथ ही साथ रोजाना वर्जिश भी कराई जाती है, क्योंकि खुराक के बाद अगर इन्हें दौडाया नहीं गया तो ये सुस्त होकर बीमार हो जाएंगे। मेले में आए मथुरा के धीनू पासी ने बताया कि आमतौर पर घोड़ी को लेकर फार्म हाउस जाना पड़ता है और वहां पैसे देने के बाद भी सही काम की गारंटी नहीं है, लेकिन यहां बादशाह के द्वारा दो बार में उनकी घोड़ी मीना गर्भ से है।
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